मौसेरे भाई बहन के साथ थ्रीसम सेक्स-2 (Mausere Bhai Bahan Ke Sath Threesome Sex Part-2)


में अब तक आपने पढ़ा कि मामा की लड़की की शादी में मेरे मौसेरे भाई बहन की कामवासना ने मेरे अन्दर भी चुदास जगा दी थी. श

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मैंने नीचे से दोनों बहन भाई को नंगा कर दिया. पूरा नंगा होना भी ठीक नहीं था. थोड़ी देर तक वे दोनों किस करते रहे और मैं विक्की का लंड हिलाती रही.
मैंने आराम से विक्की के कान में कहा- अब लंड डाल दो.

विक्की ने जैसे ही अपना लंड चूत पर रखा, तो निहारिका पेलने से मना करने लगी. वो मुझसे चुदने के लिए कहने लगी.
मैंने उसको समझाया- एक बार करने दो, फिर मैं भी करवा लूँगी. इसमें कोई गलत बात नहीं है, जरूरत पूरी करनी है बस.

मैंने जैसे तैसे उनको समझाया और विक्की का लंड उसकी बहन की चूत के अन्दर डलवा दिया. पहले तो विक्की बहुत धीरे धीरे धक्के लगा रहा था, जब निहारिका नीचे से अपने कूल्हे उछालने लगी तो विक्की के धक्कों की स्पीड भी तेज हो गयी.

मुझे लंड नहीं मिल रहा था, तो मुझे जलन सी हो रही थी. दूसरी तरफ मेरा मकसद पूरा हो गया था, तो खुश भी थी.

कुछ देर चुदाई के बाद निहारिका को दर्द होने लगा क्योंकि अब तक वो 2 बार झड़ चुकी थी.

विक्की ने एक मिनट के लिए लंड बाहर निकाला, तो मेरा मन होने लगा कि मैं अपनी चूत में लंड ले लूँ. लेकिन अगले ही मिनट में ही दोबारा से विक्की का लंड निहारिका की चूत में घुस गया था. वो दोनों फिर से शुरू हो गए. धकापेल चुदाई के 15 मिनट बाद दोनों झड़ गए. इधर मैंने भी खुद को उंगली से झड़ा लिया था.

अब करीब 3 बजने को थे तो हम सो गए.

सुबह जब उठी तो निहारिका ने मुझसे कहा- आज आप रुक जाना. हम भी रुक जाएंगे और इस रात की तरह आज की रात और हसीन बनानी है. घर जाने के बाद हमें ऐसा मौका नहीं मिलेगा.

मामा ने मेरी मम्मी को 5-6 दिन रुक जाने को कहा, तो मम्मी ने मुझसे पूछा.
मैंने कहा- मम्मी मुझे तो घर जाना है और मैं भी निहारिका और विक्की भाई के साथ अपने घर जाऊँगी. वो कभी हमारे घर नहीं गए है.
तो मौसी ने मुझसे कहा- हां ये ठीक रहेगा, तुमको कोई दिक्कत ना हो, तो निहारिका और विक्की को ले जाओ, उनको भी पहाड़ों की सैर करवा दो.
इसी बीच निहारिका ने भी कहा- हां मम्मा इस बहाने हम भी घूम आएंगे.

तो मामा मौसी और मम्मी सब मान गए. हम तीनों नहा धो कर अपने अपने कपड़े पैक कर के चल दिए.

हमारा घर मामा के घर से 3 घण्टे की दूरी पर ही है. हम तीनों बहुत ही खुश थे. घर जा कर थोड़ी देर आराम किया. विक्की को नींद आ गयी थी. शाम को जब विक्की उठा, तो 8 बज चुके थे.

तब तक मैंने और निहारिका ने खाना बना दिया था. हम तीनों ने खाना खाया. फिर मैंने मुख्य दरवाजा बन्द किया और टहलने के लिए छत पर चले गए.

मेरा घर ऊंचाई पर है, तो वहां से पूरा गांव रोशनी में जगमगाता दिखाई देता है. कुछ देर टहलने के बाद हम नीचे आ गए और टीवी देखने लगे. मैं बार बार विक्की को देख रही थी, तो विक्की ने मेरी तरफ देखा.
मैंने उसकी तरफ आंख मार दी. तभी मैं उठ कर अपने बिस्तर की तरफ चली गयी और विक्की और निहारिका को बोल दिया कि टीवी बन्द करने के बाद बेडरूम में आ जाना.

वो दोनों भी मेरे साथ ही आ गए. मैंने बेडरूम की लाइट बन्द कर दी और अपने कपड़े उतार कर पेंटी में लेट गयी. निहारिका को भी कपड़े उतारने को बोला. उसने और विक्की ने भी कपड़े उतार दिए.

मैंने कहा- निहारिका यहां कौन देखेगा हमें … क्यों न बिल्कुल नंगी हो कर सोया जाए.
इतना कहते ही निहारिका और मैंने पेंटी भी उतार दी. फिर हम दोनों विक्की के दाएं बाएं लेट गए और उसकी छाती पर हाथ फिराने लगे. विक्की पर उत्तेजना हावी होने लगी. मैंने उसका अंडरवियर उतार दिया. मेरी आंखों के सामने कोई 6 या 7 इंच लम्बा लंड हिलोरें ले रहा था.

निहारिका विक्की के साइड में लेटकर उसके होंठों को चूसने लगी. विक्की अपनी बहन की चूचियां दबा रहा था. मैंने विक्की के लंड को थोड़ी देर के लिए हिलाया और लंड को किस किया और लंड के सुपारे पर जीभ फिराने लगी.
विक्की को बहुत मजा आ रहा था. दो दो लड़कियां उनसे चुदने जा रही थीं.

कुछ देर बाद निहारिका हट गयी. मैंने कहा- निहारिका चुदने को रेडी हो जाओ.
निहारिका ने मना कर दिया और मुझे चुदने को कहने लगी और बाद में खुद चुदने का वादा किया.

मैं भी खुद चुदाई के लिए उतावली हो रही थी. मैंने विक्की के लंड को थोड़ी देर के लिए चूसना उचित समझा ताकि अच्छी तरह से लंड गीला हो जाए और मुझे अपनी चुत में लेने में कोई दिक्कत ना हो.

मैं विक्की का लंड मुँह में लेती कि मुझसे पहले ही निहारिका ने लंड को अपने मुँह में ले लिया. हम बारी बारी से लंड का आनन्द लेने लगे. मैं विक्की के ऊपर 69 पोजीशन में लेट कर लंड को चूस रही थी. विक्की भी मेरी चूत में उंगली डाल कर उंगली से ही चूत चोद रहा था. वो एक हाथ से मेरे चूतड़ों को भी मसल रहा था. मुझे इस सब में बहुत मज़ा आ रहा था.

कुछ देर लंड चूसने के बाद विक्की ने निहारिका को हटा दिया. निहारिका को लेटा कर मुझे उसके ऊपर घोड़ी बनने को कहा. मैं डॉगी स्टाइल में उसके ऊपर आ गयी और विक्की मेरे पीछे आकर मेरी चूत को चाटने लगा.

अब मुझसे रुका नहीं गया. मैंने निहारिका के होंठों को अपने होंठों में ले लिया और उनको चूसने लगी. विक्की ने मेरी चूत को अच्छी तरह से गीला कर दिया और अपना लंड डाल दिया.

अभी लंड का सुपारा ही अन्दर गया था कि मुझे हल्का सा दर्द हुआ. धीरे धीरे विक्की ने पूरा लंड अन्दर डाल दिया. मुझे हल्का हल्का दर्द भी हो रहा था और मज़ा भी आ रहा था. कुछ देर धक्के लगने के बाद मेरा दर्द बिल्कुल गायब हो गया.

अब विक्की मुझे बहुत तेजी से चोद रहा था. करीब दस मिनट की चुदाई के बाद अचानक से मेरे शरीर में अकड़न होने लगी. मैं झड़ने वाली थी. मैंने विक्की के लंड को अपनी चूत में कस कर जकड़ लिया और मैं झड़ गयी.

मैंने लंड बाहर निकलवा दिया और बिस्तर पर अपनी टांगें खोल कर मुँह के बल लेट गयी. विक्की ने निहारिका को मेरे ऊपर लेटा दिया. मेरे कूल्हे ज्यादा बड़े होने की वजह से निहारिका के कूल्हे बिल्कुल उभर आए थे.
अब विक्की ने अपना तना हुआ लंड अपनी बहन निहारिका की चूत में डाल दिया और निहारिका को चोदने लगा.

पांच मिनट तक निहारिका को चोदने के बाद अचानक से विक्की ने मेरी चूत में लंड डाल दिया और मुझे चोदने लगा. मैंने निहारिका को अपने ऊपर से हटाया और विक्की को लेटने को कहा. विक्की के लेटते ही मैंने विक्की की तरफ पीठ करके उसके लंड पर चूत रख दी और पूरा लंड अन्दर डलवा लिया.

ये मेरी पसंददीदा पोजीशन थी. मैं ऊपर नीचे होने लगी, मेरी भारी भरकम चूचियां हिल रही थीं. बीच बीच में मैं अपनी गांड को गोल गोल घुमा देती. इससे विक्की को दुगना जोश चढ़ जाता.

कुछ मिनट में ही मैं और विक्की दोनों झड़ गए. विक्की के लंड के पानी की गर्म गर्म पिचकारी मैं अपनी चूत में महसूस कर रही थी. मैं विक्की के ऊपर ही लेट गयी और कुछ देर बाद विक्की का लंड सिकुड़ कर बाहर आ गया. मैं उसके साइड में लेट गयी.

थोड़ी देर बाद निहारिका उठ कर बाथरूम जाने लगी. तो मैं और विक्की भी साथ में चल दिए. विक्की मेरे पीछे मेरे कूल्हों को देख रहा था. मैं जानबूझ कर कूल्हों को मटका कर चल रही थी. हम तीनों बिल्कुल नंगे बाथरूम में घुस गए.

बाथरूम में घुसते ही मैंने शावर चला दिया. तभी विक्की मेरे पीछे आ कर मेरे कूल्हों को दबाने लगा. निहारिका विक्की की पीठ पर अपनी चूचियां रगड़ने लगी.

दो मिनट में ही विक्की का लंड खड़ा हो गया. विक्की ने मुझे थोड़ा आगे की तरफ झुका दिया और मेरी चूत पर लंड रगड़ने लगा. उसका लंड मेरी चूत से लेकर मेरी गांड के छेद तक फिसल रहा था. तभी उसने मेरी गांड के छेद पर लंड रख कर जोर से धक्का दे मारा. विक्की के लंड का सुपारा मेरी गांड में फंस गया. मैं दर्द के मारे दीवार से सट गयी और लंड को गांड से बाहर निकाल दिया.

मुझे अंदाज़ा भी नहीं था कि वो मेरी गांड मारने वाला है. मैंने शावर बन्द कर दिया और विक्की को कहा कि चोदना है तो चूत में डालो, गांड में दर्द होता है.
विक्की मान गया और उसने फिर से अपना लंड चूत में डाल दिया. विक्की पीछे से धक्के मारने लगा. मैं भी अपनी चूत को उचका उचका कर उसका साथ देने लगी.

निहारिका मेरे सामने आ कर मेरी चूचियों को मसलने लगी. दोनों बहन भाई को पता नहीं, कितना सेक्स चढ़ा था. लेकिन मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था.

थोड़ी देर चुदने के बाद मेरा पानी निकल गया और विक्की ने लंड निकाल लिया. मैंने निहारिका को विक्की के सामने झुका दिया और विक्की का लंड पकड़ कर पीछे से निहारिका की चूत के छेद पर लंड लगा दिया.
विक्की ने एक झटके में ही लंड निहारिका की चूत में डाल दिया. विक्की अपनी सगी बहन को जोर जोर से चोद रहा था. कुछ देर बाद निहारिका झड़ गयी और विक्की भी झड़ने वाला था.

विक्की ने मुझे लंड चूसने को कहा. मैंने उसका लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी. मेरी चुसाई से उसका लंड फूल गया. मैं समझ गयी कि विक्की झड़ने वाला है. मैंने मुँह से लंड बाहर निकाल दिया और हाथ से लंड हिलाने लगी.

तभी एकदम से विक्की के लंड से पिचकारी निकली और मेरी चूचियों पर उसका वीर्य गिर गया.

विक्की झड़ कर बहुत खुश था. हम तीनों नहा कर बेडरूम में जाकर लेट गए और थकान के कारण पता नहीं, कब आंख लग गयी.

सुबह उठ कर मैं फ्रेश होने चली गयी. निहारिका और विक्की भी उठ गए थे. मैंने तीनों के लिए चाय बनाई और नंगी ही उनके सामने चाय लेकर चली गयी.

निहारिका उठ कपड़े पहनने लगी, तो मैंने उसे मना कर दिया कि रहने दे यहां कौन आएगा. जितने दिन रहो बिल्कुल नंगे ही रहो.

हम तीनों भाई बहन 5 दिन अकेले रहे, वो भी बिल्कुल नंगे.

फिर मामा का फोन आया और उन्होंने आने को बोला और मम्मी भी साथ आ गईं. निहारिका और विक्की मामा के साथ चले गए. जाते वक्त हमने अपने सम्पर्क नम्बर का आदान प्रदान किए. मैं विक्की और निहारिका से बात करती रही. कुछ दिन बाद मैं वापस अपने कॉलेज चली गयी. मैंने मम्मी और बुआ जी अनुमति ले कर उधर एक अलग कमरा ले लिया, जिसमें मेरी बुआ जी का लड़का संजय, मैं और होस्टल में मेरे साथ रहने वाली मेरी फ्रेंड नवप्रीत रहने लगी.

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